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Monday, 16 September 2013

पुलिस की केस डायरी से खुलती पुलिसिया कारवाई की पोल



बिहार में घटने वाले आपराधिक घटनाओं के इतिहास से मै ज्यादा परिचित नही हूँ, लेकिन नवरूणा अपहरण केस को बारीकी से अध्ययन करने के बाद इतना तो जरुर कह सकता हूँ कि बिहार पुलिस भारत की सबसे असंवेदनशील पुलिस है, जो बचपन और जवानी के बीच भी फर्क नही महसूस करती! वैसे तो पहली बार हमें नवरूणा केस की जानकारी दैनिक जागरण में छपी एक स्टोरी से पता लगा था, जो “ बेटी को बचाओं” शीर्षक से पत्रकार द्वारा बहुत ही मार्मिक तरीके से लिखा गया था! केस के लगभग हर पहलू से थोड़ा बहुत परिचय अपने मित्रों, पत्रकारों व नवरूणा के परिजनों से मिलता रहा है! लेकिन जब मेरे पास नवरूणा केस की पुलिस डायरी आई और उसे मैंने देखा तब मुझे पूरा यकीन हो गया कि मुजफ्फरपुर पुलिस ने अगर इस केस को प्रेम प्रसंग के दायरे में रखकर नही देखा होता तो अपनों की चहेती नवरूणा अपने घर में होती. उसका बचपन, उसके सपने सुरक्षित रहते! वह आज़ाद रहती!   

केस की डायरी के कुछ अंश मूल केस डायरी से संपादित करके आप सबके अवलोकनार्थ रख रहा हूँ ताकि आप भी पुलिस के बेशर्म चेहरे, परिजनों द्वारा असहयोग करने, भूमि-विवाद की बात छुपाने जैसे तर्कों की आड़ में नवरूणा की बरामदगी न होने के पुलिसिया आरोपों की सच्चाई परख सकें!
अपहरण के घटना की रात में परिजनों द्वारा जानकारी मिलने के तुरंत बाद पुलिस को सूचित किया गया था. पुलिस तक़रीबन 1 घंटे लेट से पहुंची जबकि थाने से नवरूणा का घर महज 4-5 मिनट की दुरी तय करके पैदल पहुंचा जा सकता है. 

खैर, पुलिस डायरी में “20 सितंबर, समय 8 बजे” अंकित रिपोर्ट के मुताबिक अनुसंधानकर्ता अमित कुमार नवरूणा के स्कूल जाते है जहाँ उसके स्कूल में आंठवी कक्षा की परीक्षाएं चल रही होती है. वे उपस्थिति पंजी को भी देखते है, जिसमे शत प्रतिशत उपस्थिति दर्ज थी. स्कूल में प्रिंसिपल और वर्ग शिक्षक से भी पूछताछ होती है. अपने पूछताछ के क्रम में वे नवरूणा के स्वभाव की प्रशंसा करते है और उसे होनहार बताते है!
    
“21 सितंबर, 9 बजे” अनुसंधानकर्ता नवरूणा की दोस्त श्रेया चौधरी से पूछताछ करते है. इस पूछताछ में श्रेया ने बताया, “ मै और नवरूणा एक ही क्लास में पढ़ते थे तथा साथ में ही ट्यूशन भी पढ़ने जाते थे. नवरूणा की दोस्ती हमसे और संस्कृति से ज्यादा थी तथा हमलोगों के अलावा क्लास के ही एक लड़के “विवेक” से भी था!”

विवेक का जिक्र आते ही उसके घर का पता पूछा जाता है. न बताने पर उसकी काफी खोजबीन की जाती है, लेकिन घर का पता नही मिल पाता है. यहाँ संस्कृति के घर का पता चल गया लेकिन विवेक का नही चला. इसलिए पुलिस संस्कृति के घर पूछताछ के लिए जाती है.  

नवरूणा की सबसे खास दोस्त संस्कृति पुलिसिया पूछताछ में बताती है कि “नवरूणा हमारी सबसे अच्छी दोस्त थी. हम आपस में हर बात शेयर करते थे. उसका किसी से कभी कोई झगड़ा नही होता था! उसने कभी किसी के बारे में तंग करने या दुश्मनी की कोई बात मुझसे नही बताई थी.”

केस डायरी में “22 सितंबर, 8 बजे” दर्ज रिपोर्ट में कहा गया है कि नवरूणा के परिजनों(माँ-पिताजी) के मोबाइल पर आए कॉल रिकॉर्ड को खंगाला गया, जिसमे कोई संदिग्ध नंबर नही मिला. सब परिजनों व दोस्तों के नंबर थे.

केस डायरी में 23 व 24 सितंबर को किसी भी प्रकार की कोई कारवाई का कुछ भी दर्ज नही है.
“25 सितंबर, 8 बजे” अंकित रिपोर्ट में लिखा गया है कि नवरूणा का कंकड़बाग, पटना में होने की सूचना मिली. वहां जाकर छापेमारी हुई लेकिन पुलिस के हाथ कुछ भी सुराग नही मिला.
केस डायरी में 26,27 व 28 सितम्बर को किसी भी प्रकार की कोई भी कारवाई का कुछ भी बात दर्ज नही है.

“29 सितंबर, 8 बजे” दर्ज रिपोर्ट में यह कहा गया है कि “गोरौल और मुजफ्फरपुर रेलवे स्टेशन पर नवरूणा के होने की गुप्त सूचना मिली लेकिन छापेमारी में कुछ भी नही मिला”.

30 सितंबर से लेकर 1 अक्टूबर के बीच किसी भी प्रकार की कोई भी कारवाई होने की कुछ भी सूचना डायरी में दर्ज नही है.  

“2 अक्टूबर, 10 बजे” अंकित रिपोर्ट में यह कहा गया कि पुलिस को नवरूणा के हाजीपुर में होने की संभावना की सूचना प्राप्त हुई, जिसके बाद छापेमारी हुई लेकिन कोई सफलता हाथ नही लगी”.       
3, 4 व 5 अक्टूबर के बीच किसी भी कारवाई की कोई भी कारवाई होने की कुछ भी सूचना डायरी में दर्ज नही है.

केस डायरी में “6 अक्टूबर, 8 बजे” दर्ज रिपोर्ट में लिखा गया है कि “अतुल्य चक्रवर्ती से पूछताछ की गई, जिसमे उनके रिश्ते-नातेदारों के बारे में जानकारी ली गई!”........”अनुसंधान जारी है” लिखकर जानकारी इकठ्ठा करने व अनुसन्धान के काम की इतिश्री हो गई.

केस डायरी में 7, 8 व 9 अक्टूबर के बीच किसी भी प्रकार के कोई भी कारवाई होने की कुछ भी सूचना दर्ज नही है.

“10 अक्टूबर, 10 बजे” अंकित रिपोर्ट में अतुल्य चक्रवर्ती के घर पहुंचकर, उनके मुजफ्फरपुर सहित अन्य स्थानों पर रह रहे रिश्तेदारों के बारे में विस्तार से जानकारी लेने की बात लिखी गई है. इसमें आगे उनकी ज़मीन से जुड़ी बातों के संदर्भ में भी विस्तार से जानकारी इकठ्ठा करने व पूछताछ के क्रम में रमेश कुमार उर्फ़ बबलू, राकेश कुमार, श्याम पटेल, सुदीप चक्रवर्ती और अजय गुप्ता द्वारा अपहरण किए जाने की बात नवरूणा के पिता द्वारा किए जाने की बात भी लिखी गई है. इसी पूछताछ में नवरूणा की माँ की बातों से यह तथ्य सामने आई कि “पिछले दो वर्षों से बहुत सारे लोगों ने ज़मीन लेने के लिए हमसे (नवरूणा के परिजनों से) संपर्क किया. संपर्क के दौरान ही नवरूणा की माँ को यह अंदेशा था कि अगर दिल्ली और बनारस में रहने वाले उसके रिश्तेदारों ने अपनी ज़मीन बेच दी और वे अकेले बच गए तो अपराधी उन्हें परेशान कर सकते है, उनकी ज़मीन हड़प सकते है.       

केस डायरी में 11 से 18 अक्टूबर तक, कुल 8 दिनों की कारवाई का कोई भी जिक्र नही किया गया है.

केस डायरी में “19 अक्टूबर, शाम सात बजे” अंकित रिपोर्ट में अजय गुप्ता की खोजबीन, उसका अपने घर से फरार पाए जाने, रमेश कुमार उर्फ़ बबलू, सुदीप चक्रवर्ती और श्याम पटेल की गिरफ़्तारी की बात लिखी हुई है.   

20 अक्टूबर की केस डायरी संदिग्ध आरोपियों को न्यायालय में पेश करने की बात करके समाप्त कर दी गई है!


यह यह बताना जरुरी है कि गिरफ्तारी नवरूणा के परिजनों द्वारा आत्महत्या की धमकी देने से हुई थी. उसके पहले तक पुलिस घर आकर लगातार झूठी दिलाशा दे रही और बाहर प्रेम प्रसंग की बात समाज में फैला रही थी. इन दोनों से आजिज़ आकर आत्महत्या की धमकी परिजनों ने दी, जिसके बाद सकते में आई पुलिस सक्रीय हुई और एसएसपी ने 24 अक्टूबर, 2012 तक नवरूणा की बरामदगी का भरोसा दिलाया(http://www.jagran.com/bihar/muzaffarpur-9779731.html).

केस डायरी में अंकित रिपोर्ट के मुताबिक अनुसंधानक अमित कुमार द्वारा 22 अक्टूबर को एसएसपी के पत्र (ज्ञापांक संख्या- 4335/CR/22.10.2012) के आलोक में नवरूणा केस, उसके मूल कागजातों के साथ थानाध्यक्ष जितेन्द्र प्रसाद को सौन्पा गया.

जितेन्द्र प्रसाद ने तेजी से जाँच का कार्य शुरू किया. पहले ही दिन कई बड़े भू-माफियाओं, जिसमे ब्रजेश सिंह और मो. शब्बू आलम जैसे नाम शामिल है, की गतिविधियों पर नजर रखने की बात केस डायरी में कही गई है.

केस डायरी के मुताबिक 29 अक्टूबर को पहली बार गिरफ्तार किए गए लोगों से पूछताछ की गई!
नवरूणा केस में कुछ ठोस होने का आभास पुलिस उपाधीक्षक(नगर) द्वारा नवरूणा की बरामदगी के लिए विस्तार से तैयार कार्य योजना (ज्ञापांक संख्या- 2109/नगर/दि.31 अक्टूबर,2012) से हुई. इस पत्र के अनुसार 8 बिन्दुओं पर काम करने के लिए पुलिस की अलग अलग टीम बनाई गई और उन्हें अनुसंधान में लगाया गया! इस पत्र के अनुसार 1 नवंबर को एक बैठक में इसकी समीक्षा की भी बात कही गई.  

सबसे महत्वपूर्ण जानकारी इस केस डायरी में 1 नवंबर को दर्ज है, जिसके मुताबिक ज्ञापांक संख्या- 5485/गो./1.11.2012 द्वारा एसएसपी ने मामले की जाँच में लगे पुलिस टीम को कुछ दिशा निर्देश दिए.

उसी दिन घटनास्थल का मुआयना DIG द्वारा की गई थी. DIG ने निरिक्षण के पश्चात्, वादी से पूछताछ व अन्य पहलुओं पर विचार करने के बाद पुलिस अनुसंधान में निम्न त्रुटियाँ पाई, जिसका जिक्र केस डायरी में की गई है. त्रुटियाँ कुछ इस प्रकार से बताई गई, जिसके बारे में परिजन भी शुरुआत से आगाह करा रहे थे :-

(1) घटना स्थल पर फोरेंसिक टीम को क्यों नही बुलाया गया?
(2) घटना स्थल का फिंगर-प्रिंट क्यों नही लिया गया?
(3) घटनास्थल से ताला क्यों नही जब्त किया गया?
(4) जिस गार्ड के पास गेट की चाभी थी, उससे ठीक से पूछताछ क्यों नही की गई?
(5) होटल के कर्मचारियों में से कई से पूछताछ क्यों नही की गई?
(6) तीन गिरफ्तार अभियुक्तों को रिमांड पर क्यों नही लिया गया?
(7) किस आधार पर अनुसंधानक परिवारवालों को बताते रहे कि लड़की सुरक्षित है और जल्द ही घर आ जाएगी?
(8) इस बात पर भी अनुसन्धान होना चाहिए कि क्या ट्रेफिकिंग के लिए उसका अपहरण तो नही किया गया!

इसमें यह भी कहा गया है कि........””विदित हो कि यह अत्यंत संवेदनशील मामला है और इस घटना को लेकर आम जनों में काफी आक्रोश है. यह मामला भू-विवाद से जुड़ा प्रतीत होता है. इस मामले में उपरोक्त बिन्दुओं पर अविलंब वैज्ञानिक अनुसन्धान तथा अन्य बिन्दुओं पर गहनता पूर्वक अनुसन्धान की जरुरत है.......अतएव आप सभी चर्चित बिन्दुओं का अनुपालन कर अद्यतन प्रगति प्रतिवेदन से दो दिनों के अंदर अधोहस्ताक्षरी को अवगत करावे. साथ ही इस कांड के अनुसन्धान से संबंधित प्रगति से प्रतिदिन अधोहस्ताक्षरी को अवगत करावे....ह. एसएसपी””.

इसके बाद का रिपोर्ट का जिक्र करना ज्यादा समसामयिक नही है क्यूंकि वह महज खानापूर्ति है. उसमे सिर्फ आरोपों की गठरी है! कहे तो पुलिसिया नाकामी की बू आती है!

यह कहने में कोई गुरेज नही कि नगर थानाध्यक्ष जितेन्द्र प्रसाद ने इस केस में अपनी तरफ से कोई कोर कसार नही छोड़ी, लेकिन नतीज़े तक न पहुँचने की बात संदिग्ध है! हो सकता है, उनपर दबाब हो. दबाब की पुष्टि भी उन्होंने की है, जिसे एक दैनिक अख़बार ने प्रमुखता से छपा भी था.
केस डायरी के सन्दर्भ में ऊपर लिखे गए तःथ्यों से कई बातों पर नज़र जाती है, जो पूरी घटना में पुलिसिया भूमिका को समझने में उपयोगी है.

पहला,  पुलिस प्रेम प्रसंग का रंग देने में शुरुआत से ही क्यों लगी रही?
दूसरा, जब अपहरण की शिकायत दर्ज की गई थी और पहले दिन ही भू-माफिया की बात करी गई थी तो चौतरफा कारवाई क्यूँ नही की गयी?
तीसरा, परिजनों को लगातार झूठे आश्वासन क्यूँ दिए गए?
चौथा, परिजनों को मीडिया से दूर रहने की सलाह क्यूँ दी गई?
पांचवा, गिरफ्तारी एक महीने देरी से क्यूँ हुई और गिरफ्तार लोगों से तुरंत पूछताछ क्यूँ नही की गयी?
छठा, पुलिस लगातार परिजनों के संपर्क में थी और परिजन प्रतिदिन पुलिस से बात करते थे, फिर असहयोग की बात कहाँ से आई?
सांतवा, परिजनों ने जिन भू-माफियाओं पर शक जताया था, उनपर कारवाई क्यूँ नही हुयी?

(अभिषेक रंजन की रिपोर्ट)
      

Monday, 2 September 2013

Bihar CM gave aasurence to Parents, we will recommend CBI investigation in Navruna case very soon.(नवरूणा केस सीबीआई को सौंपेगी बिहार सरकार, जनता दरबार में दिया मुख्यमंत्री ने आश्वासन!)

नवरूणा केस सीबीआई को सौंपेगी बिहार सरकार, जनता दरबार में दिया मुख्यमंत्री ने आश्वासन!


परिजन और शुभचिंतकों की मांग, सीबीआई को बिना देरी किए 
जाँच शुरू करने की तुरंत इजाज़त दे सरकार

बिहार के मुख्यमंत्री द्वारा नवरूणा अपहरण केस को सीबीआई के हाथों सौंपने की बात कही गई है! आज पटना में आयोजित जनता दरबार में परिजनों से मिलने के बाद मुख्यमंत्री ने इसकी घोषणा की है. CID और बिहार पुलिस की संदिग्ध कारवाई को देखते हुए यह निर्णय बहुत पहले ही ले लिया जाना चाहिए लेकिन फिर भी देरी से सही, इस निर्णय का हम स्वागत करते है.

अपहरण के तुरंत बाद मामले को प्रेम प्रसंग कहकर लटकाने, परिजनों को झूठे आश्वासन देने, उन्हें जाँच की प्रक्रिया में संदिग्ध तरीके से अँधेरे में रखने व शुभचिंतकों को लगातार मिल रही पुलिसिया धमकी की वजह से शुरुआत से ही बार बार परिजनों व शुभचिंतकों द्वारा नवरूणा मामले को सीबीआई को सौंपने की गुहार सरकार से लगाई जाती रही, लेकिन वह इस मामले में अपने पुलिसिया तंत्र के झांसे में आकर कोई करवाई नही कर पाई! यहाँ तक कि विधानसभा और विधान परिषद में भी सरकार द्वारा पुलिसिया लाइन पर ही जबाब दिए गए जो तथ्यों से विपरीत थे!

आगामी 18 सितंबर को नवरूणा को अपहृत हुए एक वर्ष बीत जाएंगे! ऐसे में देर से ही सही, हमें राज्य सरकार के इस फैसले से एक उम्मीद की नई किरण जगी है! प्रधानमंत्री कार्यालय के हस्तक्षेप के बाद सीबीआई व्यक्तिगत स्तर पर खुद इस केस की जाँच के लिए तैयार है! ऐसे में हम राज्य सरकार से यह आशा करते है कि वह जल्द से जल्द नवरूणा को अफरणकर्ताओं के चंगुल से छुड़ाने, उसे न्याय दिलाने के लिए सीबीआई को जाँच शुरू करने की तुरंत इजाज़त देगी! 

उम्मीद करते है, नवरूणा और न्याय की लड़ाई के इस अहम मोड़ पर राज्य सरकार अपनी नैतिक जिम्मेवारी का निर्वहन पूरी ईमानदारी और निष्पक्षता से करेगी! पिछले एक वर्ष से नवरूणा की सकुशल वापसी के लिए संघर्षरत परिजन व शुभचिंतकों को पूरा भरोसा है, नवरूणा और न्याय दोनों देर सवेर जरुर मिलेंगे! भू-माफियाओं, अपराधियों, पुलिस अधिकारीयों व राजनेताओं के गिरोह का भंडाफोड़ होगा! इनके आतंक से मुजफ्फरपुर और बिहार को निजात मिलेगी!   

स्टूडेंट्स फोरम फॉर सेव नवरूणा
2 सितंबर, 2013 

कृपया इसे भी देखे 
Bihar CM recommended CBI investigation in Navruna case (इलेक्ट्रोनिक मीडिया के एक चैनल की खबर का विडियो लिंक)
http://www.youtube.com/watch?v=pYru0dXotFY 
प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देश पर कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग(DoPT), भारत सरकार ने नवरूणा केस पर उपर्युक्त कारवाई करने के लिए सीबीआई निदेशक को चिठ्ठी लिखी
http://savegirlcampaign.blogspot.in/2013/08/cbi-will-inquire-navruna-case.html
सभी राजनीतिक दल, विशेषकर विपक्ष शुरुआत से ही इस मांग को लगातार दुहराता रहा है कि इस अपहरण की गुत्थी सुलझाने में सीबीआई से ही थोड़ी बहुत उम्मीद बची है इसलिए जल्द से जल्द सीबीआई को जाँच का जिम्मा सौंप दिया जाए। लेकिन सरकार परिजनों, शुभचिंतको की बात तो दूर राजनीतिक वर्ग के भी मांग को अनसुना कर रही थी। 
http://savegirlcampaign.blogspot.in/2013/01/no-faith-in-state-police-navruna-case.html  








News Link:  
Mum meets Bihar CM to probe into missing daughter: http://www.ptinews.com/news/3943064_Mum-meets-Bihar-CM-to-probe-into-missing-daughter

PMO initiative: CBI set to probe Navruna case: http://www.hindustantimes.com/India-news/Patna/PMO-initiative-CBI-set-to-probe-Navruna-case/Article1-1113257.aspx 


Missing Navruna's mother meets Nitish to seek CBI probe into the case:http://ibnlive.in.com/news/missing-navrunas-mother-meets-nitish-to-seek-cbi-probe-into-the-case/419111-3-232.html

Saturday, 24 August 2013

सीबीआई करेगी नवरूणा मामले की जाँच ( CBI will inquire Navruna case)




प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देश पर कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग(DoPT), भारत सरकार ने नवरूणा केस पर उपर्युक्त कारवाई करने के लिए सीबीआई निदेशक को चिठ्ठी लिखी है. 


गौरतलब हो कि देशभर से आ रहे निवेदन, चिठ्ठियों, ईमेल और नवरूणा के परिजनों व शुभचिंतकों द्वारा लगातार प्रधानमंत्री कार्यालय का दरवाजा खटखटाने की वजह से पीएमओ न केवल नवरूणा मामले में सक्रीय हुआ है बल्कि उसने 4 चिठ्ठियाँ भी राज्य सरकार को भेजी. यहाँ तक कि पीएमओ के अधिकारीयों ने बिहार के संबंधित अधिकारीयों को फ़ोन भी किया लेकिन कोई कारवाई नहीं हुई! अंत में थक हारकर पीएमओ ने पांचवी चिठ्ठी "कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग(DoPT)" (जिसके अन्दर सीबीआई काम करती है और जो सीबीआई को किसी मामले में जाँच करने या न करने की सलाह/निर्देश देती है) को चिठ्ठी भेजकर उपर्युक्त कारवाई करने को कहा. पीएमओ की चिठ्ठी के आलोक में सीबीआई निदेशक के पास कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग(DoPT) ने चिठ्ठी भेजी है, जिसमे उपर्युक्त कारवाई करने का निर्देश दिया गया है .

विदित हो कि 18 सितम्बर 2012 से अगवा नवरूणा का अबतक सुराग नही लगा है. नवरूणा मामले की जाँच से लेकर कारवाई करने तक, बिहार सरकार और वहां की पुलिस पूरी तरह विफल रही है. शुरुवात में प्रेम प्रसंग की बात कहकर जाँच से इनकार करने वाली पुलिस लगातार विरोध प्रदर्शन के बाद सक्रीय तो हुई लेकिन उसकी जाँच किसी नतीजे तक नही पहुंची है. व्यापक विरोध के चलते मामले को सीआईडी को सौंप दिया गया लेकिन वह भी 7 महीने बाद किसी परिणाम तक नही पहुंच पाई है. आज तो स्थिति ऐसी है कि मामले की जाँच कर रहे सभी अधिकारीयों का या तो तबादला हो गया या प्रोन्नत हो गए है. क्या जाँच हो रही है? कबतक जाँच पूरी होगी? नवरूणा जिन्दा है भी या नही? कौन लोग शामिल थे? इतनी देरी क्यों हो रही है? लगातार जाँच अधिकारीयों को क्यों बदला जाता रहा? जैसे सवाल प्रासंगिक नही रहे. यहाँ तक कि नवरूणा और उसके परिजनों की कोई खोज खबर लेने, जाँच की प्रगति बताने की कोशिश भी सरकार व पुलिस के अधिकारीयों की तरफ से नही होती.

नवरूणा मामले में शुरुआत से राज्य सरकार लगातार उदासीन बनी हुई है. एक अख़बार की रिपोर्ट और आम चर्चा से ऐसा माना जाता है कि इस केस में बड़े पुलिस अधिकारीयों की संलिप्तता है और भू माफियाओं को संरक्षण देने वाले राजनेताओं के इशारे पर इसकी जाँच ठीक से नही हो रही है. यहाँ तक कि मुजफ्फरपुर से लेकर दिल्ली तक नवरूणा के लिए आवाज उठानेवाले, विरोध करने वाले शुभचिंतकों को जबरदस्ती चुप कराने की कोशिश की गई, उन्हें उच्च अधिकारीयों के आदेश पर धमकाया गया. सुप्रीम कोर्ट में सरकार द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट में भी अबतक की हुई जाँच में विफलता ही सामने आई है. 

भू माफिया के आतंक के साए में जी रहे मुजफ्फरपुर में पिछले दिनों कई घटनाएँ घट गई लेकिन किसी भी मामले में कोई ठोस कारवाई नही हुई. कहना मुश्किल नही कि कही न कही अपराधियों के हौसले बुलंद है और वे खुलेआम लोगों की संपत्तियां कब्जें में ले रहे है और पुलिस, सरकार मूक दर्शक बने हुए है. नवरूणा अपहरण काण्ड भी उसी कड़ी का हिस्सा मात्र है. पिछले 11 महीने में पुलिस और सरकार की निष्क्रियता, विफलता से हमें राज्य सरकार व उसकी व्यस्था पर यकीं होने लायक कुछ भी नही बचा है.

इस परिस्थिति में पीएमओ द्वारा भेजी गई चिठ्ठी पर सीबीआई से कुछ कारवाई होने की आस शुभचिंतकों व परिजनों में जगी है. शुरुआत से ही हम सीबीआई जाँच की मांग करते रहे है. इस चिठ्ठी से हमारी मांग को एक नई उम्मीद मिली है. हमें भरोसा है, सीबीआई जल्द से जल्द इस केस को अपने हाथों में लेकर नवरूणा को ढूंढ निकालेगी.

"स्टूडेंट्स फोरम फॉर सेव नवरूणा" 

कार्मिक व प्रशिक्षण विभाग द्वारा सीबीआई को भेजी गई चिठ्ठी

पीएमओ द्वारा कार्मिक व प्रशिक्षण विभाग को भेजी गई चिठ्ठी


प्रधानमंत्री कार्यालय ने राज्य सरकार को 4 पत्र लिखे लेकिन कोई कारवाई नहीं हुई, अंत में पांचवा पत्र भेजने के बाद भी जब कारवाई नही हुई तो उसने मामला सीधे सीबीआई को सौंपना उचित समझा और इसके लिए कार्मिक व प्रशिक्षण विभाग को पत्र भेजा 


Wednesday, 14 August 2013

Date again extended at Supreme court ...... Is it any conspiracy behind it or just a procedural delay?



A Habeas Corpus Writ petition (criminal) number 178/2012 was filed by Shri Abhishek Ranjan and others in the honorable Supreme Court  for the safe recovery and  justice to 12 yr old Navruna and also for to restore law and order in Bihar. On its first hearing  on  7th of January 2013, Honorable court was pleased to issue a summon to Union Home Secretary, Bihar Home Secretary and Bihar DGP regarding this case, returnable in only 6 week and the second date for hearing was fixed on 25th of February 2013 but later it was again shifted to 22th of April 2013 and again to 1st of July 2013 and again shifted to 23rd August 2013, AND NOW  again shifted to 18 September, which is very far off considering the aspect of abduction of girl child as the safety and security of the kidnapped girl aged 12 year is at stack. As the life of the girl child is in danger. Neither Bihar Govt., nor Central Govt. taking any major action for it, and now court also doesn't want to hear us. Where we go? Time always changed 5-10 days before next hearing. Is it  any conspiracy behind it or just a procedural delay?  




14 August, 2013, Time: 4:50 pm

14 August, 2013, Time: 10:50 am.


Monday, 1 July 2013

Hearing of Navruna case has again been delayed until August 23!

Hearing of Navruna case has again been delayed until August 23! SC was to hear it on January 7; next date was February 25 . . . than 22 April . . . 1 July, and now August 23. Neither there is a trace of the poor girl, nor is any justice for her. Unfortunately, we cannot do anything except watching this quietly!

Thursday, 27 June 2013

Navrupa (Navruna sister) letter to Hon'ble Chief Justice regarding continuous date shifting of Navruna case



(Text of letter)

THE HONORABLE CHIEF JUSTICE,                                                                                                 
The Supreme Court of India,
New Delhi.

SUB: KIDNAPPING OF MY 12 YEAR OLD SISTER “NAVARUNA” FROM OUR OWN HOUSE AT MUZAFFARPUR, BIHAR. 9 MONTHS HAD PASSED AND SHE IS NOT RECOVERED YET AND THE  DATE OF HEARING (HEBEAS CORPUS WRIT PETITION NO. 178/2012) IS CONTINUOUSLY SHIFTING FROM 25TH FEBRUARY 2013 AND NOW AGAIN SHIFTED TO 23RD AUGUST 2013 WHICH IS TOO FAR, AS THE  LIFE OF THE GIRL IS IN DANGER AND SIR, WE CANT BUY TIME ON THIS.

Respected Sir,

This is to bring to your kind notice, that my younger sister, Navaruna Chakravartty, a student of Class VII, aged 12 years, was kidnapped from our own house by breaking the rods of window at midnight of 18th of September 2012. On detection, we immediately rushed to the local police station and lodged an FIR with them early in the morning on 19th of September, 2012. As the local police have not taken the matter seriously right from beginning. On Nov 2011, we tried to meet the Bihar’s Chief Minister but were not allowed to do so by the local police and our application was torn and destroyed by them. Lately pieces of  skeleton was planted in front of our house at Muzaffarpur on 26th  November 2012 and in the month of December, the local police, to sum up the case tried to prove the skeleton to be of my sister. They keep on insisting my parents to give blood for the DNA test, without informing us about the forensic findings either in report form or verbally, which they might have managed to their suitability.
                           Aggrieved with mental agony and befooling by local police, we then demanded the CBI probe into the case and decided not to give blood for DNA test to the local police as by that time we had already lost faith in local police. However, my parents were ready to give blood samples for DNA test to CBI or any outside agency of rapport. On a later stage the administration decided to handover the case to CID and investigation by them started afresh and after elapse of three months, forensic team came to our house and started their work. Sir, Bihar’s Police had wasted 3 precious months and later handed over the above case to CID and now the case is with the CID and they had again wasted another 6 months  in the name of their investigation without any fruitful result.

                            A Habeas Corpus Writ petition (criminal) number 178/2012 was filed by Shri Abhishek Ranjan and others in the honorable Supreme Court  for the justice to my sister and also to restore law and order in Bihar, which was called for its first hearing  on  7th of January 2013 and the honorable court was pleased to issue a summon to Union Home Secretary, Bihar Home Secretary and Bihar DGP regarding this case, returnable in only 6 week and the second date for hearing was fixed on 25th of February 2013 but later it was again shifted to 22th of April 2013 and again to 1st of July 2013 and now again shifted to 23rd August 2013, which is very far off considering the aspect of abduction of girl child as the safety and security of the kidnapped girl aged 12 year is at stack. As the life of the girl child is in danger hence Sir, please consider this case as most urgent as my sister is away from her parents for last 9 months. 

                           Sir, we are a linguistic minority at Muzaffarpur in Bihar and our safety and security is at stake there at. It is nearly nine months, my sister has been kidnapped and the police authorities are not doing anything to set her free. They are trying to save someone rather than to find the kidnapped girl. We have also approached pillar to post by meeting and communicating this shocking incident to Home Minister of India and tendered written application to President of India, Prime Minister of India, National Commission for Protection of Child Rights, National Human Rights Commission and etc. to look into the matter. Many letters were also issued from these offices to Bihar’s Chief Secretary and others but they had not responded to any of them and hence nothing has come in our way. 

                          Sir, my father is a senior citizen of this country and a heart patient too. Hence, I prey to your good self to please look into the matter on humanitarian ground and issue orders to the concerned authorities to do the needful to get my sister safely back to us at earliest. 

                          Sir, as we were deprived justice and being lured by the local administration and police, we see last ray of hope in you .Please do something for the safety of my younger sister’s life as she is in danger and the rest your honor, I leave to your wisdom and fine sense of judgement.
                           
Thanking You.

Yours Sincerely,
 (sd.)
Navarupa Chakravartty
(Elder sister of Navaruna)
Chakravartty Lane,
Muzaffarpur,
Bihar- 842 001.
Date:26/06/2013